श्याम प्रभु सा देव नहीं कोई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम प्रभु सा देव नहीं कोई, स्वार्थ के संसार में,

सुमिरन करले श्याम नाम का, पार करें मझधार से । -2

हार ना तेरी होने देगा-2

दुनिया कि खाके ठोकर -2 जो खाटू में आता है,

तेरह सीढ़ी चढ़ते चढ़ते बिगड़ी श्याम बनाता, -2

बिगड़ी सारी यहीं बनेगी -2 बाबा के दरबार में।

सुमिरन करले श्याम.......

दानी हो गये कैसे कैसे -2 श्याम सा ना कोई दानी,

शीश दान दे दिया कृष्ण को, पलभर देर नहीं मानी,-2

खाटू में दरबार लगाके, सजधज बैठे साँवरे।

सुमिरन करले श्याम.......

जिसपे किरपा करता साँवरा -2 वो तो जग में निराला है,

साथ भगत के हरदम चलता, ऐसा खाटू वाला है, -2

अपने भगत की रक्षा करता दुश्मन हर वार से।

सुमिरन करले श्याम.......

किया हुआ जो माँ से वादा -2 हरपल इसने निभाया है,

हारे हुए के साथ रहुँ, हारे को सदा जिताया है, -2

उसको कौन हरा पायेगा, जिसके मालिक साँवरे।

सुमिरन करले श्याम.......

श्याम नाम का महामंत्र ये -2 फल देता मनमानी है,

कलयुग का ये देव दयालु, महिमा इनकी न्यारी, -2

छोड़ दें जीवन श्याम पे संजय, भली करेंगे साँवरे।

सुमिरन करले श्याम....... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।