आई आई हरि की बारात ( तुलसी विवाह )

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

आई आई हरि की बारात ( तुलसी विवाह )

धुन :- नी मैं नचना मोहन दे नाल

आई आई हरि की बारात, आज हम नाचेंगे।

हरि नाचेंगे हमारे साथ, आज हम नाचेंगे।।

नगर डगर सब खूब सजे हैं।।

घर घर खुशियों के दीप जगे हैं।।

रंग रस की हो रही बरसात

आज हम नाचेंगे.....

रथ सवार है दुल्हा राजा।

बजे ढोल डफ शहिनाई बाजा।।

देवी देवता, आए हैं साथ।

आज हम नाचेंगे.....

तुलसी विवाह का लगा है मेला।

मधुर मिलन का ‘‘मधुप’’ यह बेला।।

देव प्रबोधिनी एकादशी की रात।

आज हम नाचेंगे..... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।