वृंदा-विष्णु लांवा फेरे

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

वृंदा-विष्णु लांवा फेरे

धुन: रेश्मी सलवार ते कुर्ता जाली दा ।

बैठे दोनों सज-धज, नेड़े नेड़े ने।

होंण लगे वृंदा-विष्णु दे फेरे ने॥

इक सांवरा ते इक गोरी। बड़ी सुन्दर सोहनी जोडी॥

चर्चे इस जोड़ी दे चार चुफेरे ने - होंण लगे....

वृंदा वरमाला पाई। वृंदा वरयो हरिराई॥

बरसे रंग रस कलियां फुल बथेरे ने - होंण लगे.....

मंगल धुन वेदां गाई। हर वैदिक रीत निभाई॥

वर वधु ने लए वेदी दे फेरे ने - होंण लगे......

होई शगणां नाल विदाई। डोली बैकुंठ विच आई॥

गीत ‘‘मधुप’’ दे गूंजे चार चुफेरे ने - होंण लगे..... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।