बधईया बाज रही ( देवउठनी एकादशी )

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

( बधईया बाज रही )

धुनः मथे ते चमकन बाल अज मेरे बनड़े दे

हो रहा मंगलाचार, बधईया बाज रही।

बाज रही बधईया बाज रही-हो रहा मंगलाचार।।

देवउठनी एकादशी आई,

कार्तिक-शुक्ल सुकाल-बधईया.....

बनी दुल्हनियां तुलसां रानी,

दुल्हा हरि सरकार- बधईया.....

देवी देव बने बाराती,

नाच रहा संसार-बधईयां.....

बाज रहे बाजे शहिनाईयां,

हो रही जय जयकार-बधईया......

घुंगट में वृंदा शरमावे,

हरि को हर्ष आपार-बधईया......

कहै ‘‘मधुप’’ यह पावन गाथा,

देती है फल चार-बधईया..... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।