अम्बे मैया के दीवाने दोउ नैन

पारंपरिक
श्री राम गुरु वाणी दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

साखी

मां ममता की मूर्ति मां ममता मां प्यार।

मां के बंधन से बंधा, ये सारा संसार।।

अम्बे मैया के दीवाने दो नैन,दरस बिन जिया ना लगे

जिया ना लगे हो रामा जिया ना लगे।

अम्बे मैया के दीवाने दो...

(1) प्यासी प्यासी अंखियां है,प्यासी है नजरिया।

छोड़ कहां जाऊं अम्बे मैया की दुवरिया।।

सारी दुनियां में मिले न कहीं चैन,दरस बिन जिया ना लगे।

अम्बे मैया के दीवाने दो...

(2) पल में बनाती मैया,पल में मिटाती।

धूप छांव जैसी माया समझ न आती।

धरती अम्बर चंदा तारे तेरी देन,दरस बिन जिया ना लगे।

अम्बे मैया के दीवाने दो...

(3)भूले न भुलाए भोली भाली सी सुरतिया।

मैया तेरे दर पे बीते हमरी उमरियां।।

छलके गीतों की गंगा दिन रैन,दरस बिन जिया ना लगे।

जिया ना लगे हो रामा जिया ना लगे।।

अम्बे मैया के दीवाने दो नैन,दरस बिन जिया ना लगे।।

।डॉ सजन सोलंकी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।