पा के सुंदर बदन कर प्रभु

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॥ पावन पाठ ॥

पा के सुंदर बदन कर प्रभु का भजन,

जिंदगानी का कोई भरोसा नहीं,

जो भी आया यहां उसको जाना पड़े,

दुनिया फानी का कोई भरोसा नहीं,

बालपन खेल और कूद में को दिया,

फिर जवानी का आसार आने लगा,

ऐसी सुन्दर घडी कर कमाई भली,

नौजवानी का कोई भरोसा नहीं,

पा के सुंदर बदन......

अरबो वाले गए खरबो वाले गए,

कितने गोली व गोले रिसाले गए,

कितने राजा गए कितनी रानी गई,

राजधानी का कोई भरोसा नहीं,

पा के सुंदर बदन......

श्रेष्ठ जीवन बना कर सभी का भला,

तेरे जीवन में सुख शांति आ जाएगी,

गर करेगा भला तेरा होगा भला,

बदगुमानी का कोई भरोसा नहीं,

पा के सुंदर बदन....

खाली हाथो जहाँ से सिकंदर गया,

सब खजाने की चाबी धरी रह गई,

वैद लुकमान को भी क़ज़ा खा गई,

लाभ हानि का कोई भरोसा नहीं,

पा के सुंदर बदन.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।