सजा है श्री राम दरबार

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सजा है श्री राम दरबार ,

राजा राम के राज्य-तिलक का ,आज है शुभ दिन वार॥

सिंहासन सियाराम बिराजै। तीनों भाई इत-उत साजै॥

चरणों में हनुमान खड़े हैं ,शोभा अपरम्पार।

सजा है......

गुरुवर तिलक राम को दीन्हां। माताओं ने आशीष दीन्हां॥

सुर-नर ,पुरूजन ,परजन जन-गण ,बोलें जय जयकार।

सजा है......

बाज रहे हैं अनहद बाजे। हर कोई झूमें हर कोई नाचे॥

कनक भवन मंगल-धुन बाजे ,हो रहा मंगलाचार।

सजा है......

राजा राम अवधपति राजे। यथा योग्य सब लोग नवाज़े॥

लूट मची है खूब ‘‘मधुप हरि’’ ,लूट रहा संसार।

सजा है...... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।