जिथे रवां मैं मेरी दातिए मेरे अंग संग रहना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जिथे रवां मैं मेरी दातिए मेरे अंग संग रहना-2

अंग संग रहना मेरे संग संग रहना-2

जिथे रवां मैं....

चाहे हो कालिया राता, चाहे हनेरिया राता-2

बांह पकड़ मेरी दातिए मेरे अंग संग रहना-2

जिथे रवां मैं....

किसे दा कोइ सहारा किसे कोइ सहारा -2

मेरा सहारा तुही दातिए मेरे अंग संग रहना-2

जिथे रवां मैं....

चाहे मैनू तुप सतावे चाहे मैनू दुःख सतावे -2

डोल न जावा मेरी दातिए मेरे अंग संग रहना-2

जिथे रवां मैं....

अंग संग रहना मेरे संग संग रहना-2

सारा जग छोड़ के बैठी तेरे नल प्रीता लाईया-2

चरना नल ला के रखी पावी न कदे जुदाईया-2

अपना बना लै मेरी दातीए मेरे अंग संग रहना-2

जिथे रवां मैं मेरी दातिए मेरे अंग संग रहना,

बांह पकड़ मेरी दातिए मेरे अंग संग रहना,

मेरा स हारा तूही दातिए मेरे अंग संग रहना ।

जिथे रवां मैं.... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।