कल्लाजी महाराज मेरे अंगना पधारो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कल्लाजी महाराज मेरे अंगना पधारो,-2

अंगना पधारो मेरे घर में पधारो,

नित ही निवेदन करता हूं मैं आकर मुझको तारो ।

जीवन नैया डूबी जाए,कोई ना इसको पार लगाए-2

मन में इक आशा को लेकर,ठाकुर द्वार तुम्हारे आए,

सबको छोड़ छोड़ कर बैठा-2, तुम ही एक सहारो,

कल्लाजी महाराज....

सपने पल भर में ही टूटे, तुम्हरी खातिर अपने छूटे-2

इन नयनों से देख न पाऊं,लगता है प्रभु तुम भी रूठे,

कृष्णाजी के संग में आकर-2,जीवन मेरा सँवारो,

कल्लाजी महाराज....

अंगना में सब फूल बिछाकर घर को खूब सजाया मैंने-2

केसर की खुशबू से ठाकुर निज घर को महकाया,

शबरी जैसा हुआ मेरा मन-2, बनकर राम पधारो,

कल्लाजी महाराज....

नित ही निवेदन करता हूं मैं आकर मुझको तारो-2

कल्लाजी महाराज मेरे अंगना पधारो-2

अंगना पधारो मेरे घर में पधारो।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।