मैं गोवर्धन पे जाऊँ आऊँ परिकम्मा लगाए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं गोवर्धन पे जाऊँ आऊँ परिकम्मा लगाए-2

आऊँ परिकम्मा लगाए में तो आऊँ परिकम्मा लगाए-2

मैं गोवर्धन पे जाऊँ आऊँ परिकम्मा लगाए-2

1 ) मुरली मनोहर कान्हा की मैं छवि हृदय में धारूंगी,

सात कोष की दउ परिक्रमा नहीं थको ना हारूंगी,

मानसी गंगा नहाऊं-2,आऊँ परिकम्मा लगाए

मैं गोवर्धन पे......

2 ) दर्शन कर गिरिराज धरण के मैं अपने भंडार भरूं,

जितने विधि विधान वहां के श्रद्धा से में सभी करूं,

मैं फूली नहीं सामाऊँ-2,आऊँ परिकम्मा लगाए,

मैं गोवर्धन पे......

3 ) गोवर्धन पै जब कोई जावे कृपा हो गिरधारी की,

जीप कार या मोटरसाइकिल इच्छा नहीं सवारी की,

मैं पैदल दौड़ लगाऊं-2,आऊँ परिकम्मा लगाए,

मैं गोवर्धन पे......

4 ) ना लाऊँ कोई बात ध्यान में गोविंद के गुण गाउंगी,

हाथ में तुलसी की माला ले उनमें चित रमाऊंगी,

ना भूलन धोखा खाऊं-2,आऊँ परिकम्मा लगाए,

मैं गोवर्धन पे......।

आऊँ परिकम्मा लगाए में तो आऊँ परिकमा लगाए-2

मैं गोवर्धन पे जाऊँ आऊँ परिकम्मा लगाए-2 ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।