गिरिराज धरण की जय ,ना कोई चिंता ना कोई भय

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गिरिराज धरण की जय ,ना कोई चिंता ना कोई भय -2

गिरिराज धरण की जय ,ना कोई चिंता ना कोई भय।

दर्शन परसन और परिक्रमा-2 ,

अद्भुत गोवर्धन की गरिमा -2

महिमा अवर्णीय है-ना कोई चिंता ना कोई भय-2

गिरिराज धरण की जय ,ना कोई चिंता ना कोई भय।

गोवर्धन है देव हमारो,ब्रज रक्षक है पालनहारो। -2

ब्रजदेव हरे सब भय-2,ना कोई चिंता ना कोई भय-2

गिरिराज धरण की जय ,ना कोई चिंता ना कोई भय।

नंदनंदन गिरिराज उठायो ,ब्रज को छप्पन भोग लगायो -2

इंद्रदेव शरण पड़यो है-2,ना कोई चिंता ना कोई भय-2

गिरिराज धरण की जय ,ना कोई चिंता ना कोई भय।

‘‘मधुप’’ गोवर्धन के गुण गाओ ,फल चारों गिरिराज से पाओ-2

ये बात सर्वसिद्ध है ,ना कोई चिंता ना कोई भय-2

गिरिराज धरण की जय ,ना कोई चिंता ना कोई भय।

ना कोई चिंता ना कोई भय-4 ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।