गोवेर्धन पूजा-अन्नकूट महोत्सव संकीर्तन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोवेर्धन पूजा-अन्नकूट महोत्सव संकीर्तन

हमारो धन ,परमधन ,जीवनधन गोवर्धन महाराज ,

जो मांगो सो देवे दाता ,बड़ो गरीब-नवाज़।।

नंद-नंदन स्वरुप गोवर्धन ,ब्रजमंडल की शान।

इंद्र को इंद्र ,देव देवन को ,साक्षात भगवान।।

महिमा अपरम्पार गोवर्धन ,संत भगत गुणगात ,

हमारो धन.....

पूर्व में श्री जगन्नाथ जी ,पश्चिम द्वारिकानाथ।

रामेश्वर दक्षिण दिशा में ,उत्तर में बद्रीनाथ।।

इन चारों के बीच सुशोभित ,श्री गोवर्धन नाथ,

हमारो धन.....

जगत-वासना, राग द्वेष अरु दुःख दरिद्र टारे।

भक्ति ज्ञान विवेक बढ़ावे ,प्रेम रंग रंग डारे।।

मानसी गंगा में कर पावन ,रास लीला दिखलात ,

हमारो धन.....

कभी भारी कभी फूल सों हल्का ,चमत्कार अत्ति न्यारे।

अत्ति सुन्दर अदभुत अलौकिक ,मधुप हरी बलिहारे।।

वंशी नाद गोपाल करत जहां ,चरत गो-बछड़े घास ,

हमारो धन..... ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।