आरती श्री गुरुदेव की गाउँ

पारंपरिक
विष्णु भगवान आरती गुरुदेव भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

आरती श्री गुरुदेव की गाउँ ,

मन मंदिर में ज्योत जगाकर ,श्री गुरुदेव का दर्शन पाऊं।

गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु महेश्वर ,गुरु ही वेद पुराण प्राणेश्वर।

कर वंदन नित शीश झुकाऊं - आरती श्री......

ज्ञान ध्यान ईश्वर की भक्ति ,बिन गुरुकृपा मिले नहीं मुक्ति।

निशिदिन श्री गुरुदेव मनाऊं - आरती श्री......

गुरुमंत्र गुरुवाक्य अनूठा ,नाम जपत आवत है झूटा।

कर रसपान अमर फल पाऊं - आरती श्री......

काग से हंस बनावे स्वामी ,गोविन्द मिलन करावे स्वामी।

गुरु कृपा पै बलि बलि जाऊं - आरती श्री......

जो जन प्रेम से आरती गावे , "मधुप" सदा सुख शान्ति पावे।

चापत चरण शरण सुख पाऊं - आरती श्री......

( बोलो गुरुदेव स्वामी मुकुन्दहरि महाराज की जय )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।