मोहे लागी लगन मनमोहन से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोहे लागी लगन मनमोहन से -2 ,

छोड़ घरबार ब्रजधाम में आय बैठी ,

मोरे नैनों से -2,निंदिया चुराई जिसने ,

मैं तो नैनां उसी से लगाए बैठी।

मोहे लागी लगन....

कारो कन्हैया सो काजल लगाईके ,

गालों पे गोविन्द गोविन्द लिखाइके।-2

गोकुल की गलियों में गोपाल ढूंढूं ,

मैं भाँवरी अपनी सुधबुध गँवाईके ,

मिल जाए रास बिहारी,मैं जाऊं वारी-2 ,

कहदूँ नटखट से बात हिया की सारी ,

बात समझेगो-2 मेरी बिहारी कभी ,

ये शरत मैं खुदी से लगाई बैठी।

ऐसी लागी लगन मनमोहन से -2 ,

छोड़ घरबार ब्रजधाम आय बैठी।

जो हो सो हो अब ना जाऊं पलट के,

बैठी हूँ कान्हा की राहों में डट के। -2

जबतक ना मुखड़ा दिखाए सलोना ,

काटूंगी चक्कर यूहीं वंशीवट के ,

उस मोरमुकुट वाले से ,गोविंदा से ग्वाले से ,

मन बाँध के रखना है उस मतवाले से ,

जाने आ जाए-2 कब चाँद वो सामने ,

भोर से ही मैं खुद को सजाए बैठी।

मोहे लागी लगन मनमोहन से ,

छोड़ घरबार ब्रजधाम आय बैठी।

मोरे नैनों से -2,निंदिया चुराई जिसने ,

मैं तो नयना उसी से लगाए बैठी।

मोहे लागी लगन....।

हरे कृष्णा ,हरे कृष्णा ,कृष्णा कृष्णा हरे हरे।

हरे रामा ,हरे रामा ,रामा रामा हरे हरे।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।