जहां राधे नाम रसधार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जहां राधा नाम रसधार बहे ,वहीं रास बिहारी रहते हैं-2 ,

जहाँ हर मन-2, राधे-राधे कहे वहीं रास बिहारी रहते हैं।

है राधा रानी के वश में ,जग को नाच नचाये जो -2

ब्रज रानी का मान के कहना ,गोपी भी बन जाए वो ,

नाम जहां सुनले राधे का-2 ,सबको वहीं नचाये वो ,

जहां बात हो राधेरानी की ,ब्रजरानी की ,महारानी की ,

वहीं श्याम मिले सब कहते हैं।

जहां राधा नाम रसधार बहे ,वहीं रास बिहारी रहते हैं।

नटखट नंदकिशोर से पूछो,ब्रजनंदन चितचोर से पूछो -2

कैसे चुराया दिल राधे ने ,उस माखन के चोर से पूछो ,

ये कारो मतवारो कान्हा -2 ,राधा रस में रंग गयो रे ,

जहां चर्चा हो -3,ब्रजरानी की,बरसाने की,महारानी की ,

वहीं श्री गिरिधारी रहते हैं।

जहां राधा नाम रसधार बहे ,वहीं रास बिहारी रहते हैं।

वहीं रास बिहारी रहते हैं-3

जहाँ हर मन राधे राधे कहे ,वहीं रास बिहारी रहते हैं -2

जहां राधा नाम रसधार बहे ,वहीं रास बिहारी रहते हैं -2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।