आरती तुलसी माता की

पारंपरिक
श्री कृष्ण आरती कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।

घर घर तुलसी पूजा ,सब जग गुण गता।। जय तुलसी....

रूप जलंधर का घर ,विष्णु की माया ,

माया ने कर कौतुक ,वृंदा को भरमाया। जय तुलसी.....

पति पारायण वृंदा ,विष्णु को शाप दिया ,

उसी शाप के बल पर ,शिला विष्णु को किया। जय तुलसी.....

वृंदा तुलसी बनकर परमगति पायो ,

लक्ष्मी से भी बढकर ,हरी प्रिया कहलायो। जय तुलसी.....

तुलसी बनकर वृंदा ,मरकर भी जिंदा ,

देव असुर सब पूजित ,परम सति वृंदा। जय तुलसी.....

देव उठनी एकादशी ,कार्तिक में आवे ,

तुलसी विवाह का उत्सव ,हर मन को भावे। जय तुलसी.....

सजे मण्डप, सजे वेदी, हर कोई दान करे ,

शालिग्राम श्री विष्णु ,तुलसी का वरण करे। जय तुलसी.....

गंगा यमुना जैसी ,अति पावन तुलसी ,

बन संजीवन औषधि ,रोग शोक हरती। जय तुलसी.....

तुलसी दर्शन पूजा ,जो गुणगान करे ,

कहै ‘‘मधुप’’ माँ तुलसी ,उसे भव पार करे। जय तुलसी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।