करवाचौथ का त्योहार आया

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॥ पावन पाठ ॥

आज सजी हूँ दुल्हन सी मैं ,

कब तुम आओगे पिया।

अपने हाथों से पानी पिलाकर ,

कब गले से लगाओगे पिया।।

धुन :- लेखक के प्रसिद्ध भजन फूल बंगले की शोभा है न्यारी

करवाचौथ का त्योहार आया, घर घर में है आनद छाया।

कई सदियों पुराना यह त्योहार है।

पति पत्नी का इसमें छुपा प्यार है॥

बेला मधुर मिलन का है आया - घर घर में.....

हर सुहागिन सुहाग मना रही है।

सज-धज के पिया को रिझा रही है॥

नई दुल्हन सा रूप बनाया - घर घर में.....

अपनी प्रिया को प्रियतम बुला रहा है।

चाँद निकल आया ,बतला रहा है॥

दरस पिया का चाँद में पाया - घर घर में.....

हर सुहागिन ‘‘मधुप’’ यह इबादत करे।

जोरी सदा सुहागिन - सलामत रहे॥

हर नारी ,नारी धर्म निभाया - घर घर में.....।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।