रे साधक सावधान

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॥ पावन पाठ ॥

रे साधक सावधान

एक-एक इन्द्रि के वश में सबने प्राण गवाये - 2

जिणरी पाँचों नाही वश में भाई उणरा कौन हवाल ? साधक सावधान !

रूप रे वश में भया पतंगा, आकर्षण लुभाये रे - 2

जाय पड्यो अग्नि रे भीतर, देह भस्म कर जाय रे - 2

भँवरा भया सौरभ रे वश में, जा बैठा पुष्पों के माय

नाक सुगन्धि रिझाये रे, फूल में कलमा जाये रे - 2

रसना रे वश में मीन भयी, मीठा स्वाद सुहाय रे - 2

काटा कंठ पसार रे, तड़प-तड़प मर जाय रे - 2

काम रे वश गजराज भया, देखी गजनी कागद री -2

शक्तिहीन खुद को कर बैठा, नाथ डाल ले जाय -2

कानो रे वंश में हिरणी भयी, सुन सुन्दर हो राग रे -2

गयी शिकारी हाथों में, गंवाई सुन्दर देह अपनी - २

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।