तेरी शरण में आके मैं धन्य हो गया हूं

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया,

जन्मों की प्यास थी जो,-2 मैं सम्पन्न हो गया,

तेरी शरण मे आके, मैं धन्य हो गया॥

तुझको अपना बनाके मैं धन्य हो गया ।

कितने मिले अमीर यहां, कितने मिले गरीब -2

पर आप मिल गये तो, धनवान हो गया,

तेरी शरण मे आके, मैं धन्य हो गया॥

जन्मों की प्यास थी जो,-2 मैं सम्पन्न हो गया।

दुःख में तड़प रहा था प्रभु, मुद्दतों से मैं,-2

इक आपका सहारा,-2 साकार हो गया,

तेरी शरण मे आके, मैं धन्य हो गया॥

जन्मों की प्यास थी जो,-2 मैं सम्पन्न हो गया।

करना कभी ना दूर प्रभु, चरणों से आप,-3

चरणो के ही सहारे, मैं भव पार हो गया,

तेरी शरण मे आके, मैं धन्य हो गया हूं॥

जन्मों की प्यास थी जो,-2 मैं सम्पन्न हो गया।

तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया,

जन्मों की प्यास थी जो, मैं सम्पन्न हो गया,

तेरी शरण मे आके, मैं धन्य हो गया॥

जय जय श्री राधे ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।