हे दयामय हम सबों को शुद्धताई दीजिए

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॥ पावन पाठ ॥

हे दयामय हम सबों को शुद्धताई दीजिये ।-2

दूर करके हर बुराई को भलाई दीजिये ॥-2

कीजिये हम पर कृपा ऐसी अहो परमात्मा ।

हों सभासद इस सभा के सब के सब धर्मात्मा ॥ १ ॥

हे दयामय हम.....

हो उजाला सब के मन में ज्ञान के प्रकाश से ।

और अन्धेरा दूर सारा हो अविद्या नाश से ॥ २ ॥

हे दयामय हम.....

खोटे कर्मों से बचें और तेरे गुण गावें सभी ।

छूट जावें दु:ख सारे सुख सदा पावें सभी ॥ ३ ॥

हे दयामय हम.....

सारी विद्याओं को सीखें ज्ञान से भरपूर हों ।

श्रेष्ठ कर्मों में हों तत्पर दुष्ट गुण सब दूर हों ॥ ४ ॥

हे दयामय हम.....

यज्ञ हवन से हो सुगन्धित अपना भारतवर्ष देश ।

वायु जल सुखदायी होवें जायें मिट सारे क्लेश ॥ ५ ॥

हे दयामय हम.....

वेद के प्रचार में होवें सभी पुरुषार्थी ।

होवे आपस में प्रीति और बनें परमार्थी ॥ ६ ॥

हे दयामय हम.....

लोभी कामी और क्रोधी कोई भी हम में न हो ।

सर्व व्यसनों से बचें और छोड़ देवें मोह को ॥ ७

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।