गंगा किनारे दरबार है तेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

गंगा किनारे दरबार है तेरा,

कर दे माँ मेरी नैया तू पार,

गंगा किनारे दरबार है तेरा,

ऊँचा भवन तेरा ऊँचा हैं नाम,

सबके साँवरे मैया तू काम,

चरणो में तेरे तीरथ सारे,

ओर बेस हैं चारो धम,

गोद में तेरी सुख हैं अपार,

करदे माँ मेरी नैया तू पार,

गंगा किनारे दरबार है तर........

परम कृपालु तू कल्यानी,

पति पावनी मात भवानी,

ताव घुण गाती सब सुख धटि,

मैया मेरी हैं वरदाती

मानवा मेरा करता पुकार,

करदे माँ मेरी नैया तू पार,

गंगा किनारे दरबार है तर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।