मावलिया वो मोरे मावालिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मावलिया वो मोरे मावलिया,

मावलिया वो मोरे मावलिया।-2

जावत हावस छोड़ के बड़ सुरता आबे वो ।

अवईया बछर म दाई अउ फेर आबे वो ॥-2

मावलिया वो मोरे मावलिया-2

दिन लागे महिना बरोबर महिना लागे साल ।

साल भर म होगेन कईसे हाल ले बेहाल॥-2

मावलिया वो मोरे....

सुरता के पुरता होगे रही रही सुरता आए।-2

तोरे भाव भगती म दाई नैना ले नीर बहाए॥ -2

मावलिया वो मोरे....

जो जोही जोरत जोरन बईठे हन तोर आस। -2

आबे अंबे अरझे रही सांसा अउ विश्वास॥-2

मावलिया वो मोरे....

दाई बहिनी पारा भर के जम्मो झन ला रोवाए।-2

लव बिदाई आखरी दाई कोसरिया माथ नवाए ॥-2

मावलिया वो मोरे....

हे मावलिया वो मोरे मावलिया ,

हे मावलिया वो मोरे मावलिया।-2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।