माँ तू ही सबकी पालनहार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ तू ही सबकी पालनहार ,

माँ तू ही सबका करती उधार ,

आदि भवानी माँ तेरी जय हो मैया। -2

जल थल और नभ में ,जीव जंतु है तूने बनाये ,

रचना कर गजब की ,कई लोक हैं तूने बसाये ,

चाँद सूरज सितारों में,तेरी ही नूरानी माँ।

तेरी जय हो मैया।आदि.....

वन पहाड़ नदियां ,फल फूल ये बाग़ बगीचे ,

खेत खनिज ये मौसम ,क्या नजारे हैं तूने ये सींचे ,

कुदरत का हर जलवा ,तेरी कहानी माँ।

तेरी जय हो मैया।आदि.....

दो दो ही जोड़े ,हर चीज के तूने जड़े हैं ,

माँ माया से हटकर ,तूने कौतुक अजब ही करे हैं ,

माँ के ‘‘मधुप’’ रूप गुण धाम ,लीला लसानी है।

तेरी जय हो मैया।आदि.....

आदि भवानी माँ तेरी जय हो मैया।-2

जय माता दी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।