भोग लगाते समय भोग पद गान

पारंपरिक
महादेव कथा दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

राम कृष्ण गोविन्द,बम्म भोले आओ ।

दुर्गे भवानी मैया , भोग लगाओ।।

पूजा पाठ जप ध्यान कियो है,

कथा कीर्तन गुणगान कियो है।

स्वीकार करके शरण में लगाओ - दुर्गे भवानी मैया ....

बात निहारें तोरी भगत प्यारे ,

लगी भीड़ भारी मैया तेरे द्वारे।

रहमत के जलवे बरसाते आवो - दुर्गे भवानी मैया ....

शबरी सुदामा विदुरानी से देखे ,

प्रबल प्रेम में पड़ गए भुलेखे।

फिर भाव की वोही गंगा बहावो - दुर्गे भवानी मैया ....

बड़े प्रेमसे हम पदार्थ यह लाये ,

चाखो मैया जी अमृत बन जाए।

रस नाम का जन "मधुप"को पिलावो - दुर्गे भवानी मैया ....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।