माता लाल देवी जी आरती

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आरती लाल मैया जी की

आरती लाल मैया जी तेरी गाऊं ,

निशिदिन प्रेम की ज्योत जगाकर ,मुख से जय जयकार बुलाऊं।।

छिन्नमस्तिका अवतार तुम्हारा ,चिंतपूर्णी है रूप साकारा ,

इसी रूप का ध्यान लगाऊं -आरती लाल मैया....

लाल भवन की लाल भवानी ,संतों भगतों की महारानी ,

जग जननी बलिहारी जाऊं -आरती लाल मैया....

सिद्ध पीठ तेरा लाल द्वारा ,सब जग से लगता है न्यारा ,

सब देवन के दर्शन पाऊं -आरती लाल मैया....

आरती वंदन दरस तुम्हारा ,करदे जीवन में उजियारा ,

निशिदिन तेरी महिमा गाऊं -आरती लाल मैया....

जो जन प्रेम से आरती गावे ,दास "मधुप" सुख सम्पति पावे ,

चरण कमल नित शीश नवाऊं -आरती लाल मैया....

( लाल पवन 'च' निवास करन वाली माता जी तवाड़ी सदा ही जय )

( जयकारा चिंतपूर्णी माई दा ,बोल साचे दरवार की जय )

( जयकारा मैया लाल भवानी दा ,बोल साचे दरवार की जय )

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।