द्वितीय ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा अवतार

पारंपरिक
माता दुर्गा मंत्र दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

द्वितीय ब्रह्मचारिणी

द्वितीय ब्रह्मचारिणी ,नवदुर्गा अवतार।

दूजे नवरात्र इसी ,रूप का हो दीदार।।

ब्रह्माणी ब्रह्मवादिनी ,गायत्री जगमात।

शास्त्र वेद पुराण की ,मात यही विख्यात।।

हाथ कमण्डल और माला ,अति सुंदर श्रृंगार।

भक्ति शक्ति ज्ञान बल ,बुद्धि देवनहार।।

देवऋषि श्री नारद ने ,दियो मंत्र उपदेश।

चली तपस्या को उमा ,पाने पति परमेश।।

शाक फूल फल बिलपत्र ,का लीन्हा आहार।

बरस हजारों बीत गये ,निर्जल निराहार।।

अपर्णा ब्रह्मचारिणी ,कीन्हा तप कठोर।

घोर तपस्या से हुआ ,तन शिथिल कमज़ोर।।

ऐसी कठिन तपस्या ,नहीं देखी संसार।

सातद्वीप नौ खण्ड में ,मच गई हाहाकार।।

उमा तपस्या छोड़ दे ,बोली मैनां मात।

मिल जायेंगे नाथ तुम्हें ,शंकर भोला नाथ।।

दुर्गा के इस रूप की ,पूजा करें जो लोग।

मिले "मधुप" यश कीर्ति ,कट जावें भव रोग।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।