सुनले ले ओ मैया मोरी काहे को

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

(फिल्मी तर्ज़, दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में )

सुनले ओ मैया मेरी, काहे को देरी लगाई

आज ओ शेरो वाली माई,

तू तो आजा ओ शेरो वाली माई ।

तुमको ओढायें मैया लाल चुनरिया,

आजा मां शेरो वाली मेरी नगरिया ।

अपनी दया का मैया तू दान दे दे ,

भक्तों को भक्ति का वरदान दे दे।

पूजा करें मां तेरी, तेरी ही ज्योत जगाई,

आजा ओ शेरो वाली माई ,

तू तो आजा ओ शेरो वाली माई ।

सुनले ओ मैया मेरी, काहे को देरी लगाई

आज ओ शेरो वाली माई,

तू तो आजा ओ शेरो वाली माई ।

ज्ञान बिना मेरे हुए कर्म सारे,

आई समझ तो तेरे चरण पखारे ।

चरणों की रज अपने माथे पे रखकर,

हमने उम्मीदों से आंगन बुहारे ।

आंगन में आजा मैया, काहे को देरी लगाई

आजा ओ शेरो वाली माई ,

तू तो आजा ओ शेरो वाली माई ।

सुनले ओ मैया मेरी काहे को देरी लगाई

आजा ओ शेरो वाली माई,

तू तो आजा ओ शेरो वाली माई।।।

लिरिक्स _ प्रदीप गौर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।