अमृत की बरसे बदरिया

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अमृत की बरसे बदरिया

==================

अमृत की, बरसे बदरिया,

अम्बे, माँ की दुअरिया l

अमृत की, बरसे बदरिया,

ओए मेरी, माँ की दुअरिया l

अमृत की, बरसे बदरिया...

दातुर मोर, पपीहा बोले l

पपीहा बोले, पपीहा बोले l

दातुर मोर, पपीहा बोले,

कूके-2 जय हो-2 काली कोयलिया,

ओए मेरी, माँ की दुअरिया

अमृत की, बरसे बदरिया...

शीश मुकुट, कानों में कुण्डल ll

सोहवे-2 जय हो-2, लाल चुनरिया,

ओए मेरी, माँ की दुअरिया

अमृत की, बरसे बदरिया...

माथे की बिन्दिया, चम चम चमके l

चम चम चमके, चम चम चमके l

माथे की बिन्दिया, चमचम चमके,

जैसे-2 जय हो-2, गगन में बिजुरिया,

ओए मेरी, माँ की दुअरिया

अमृत की, बरसे बदरिया...

सूरज चन्दा, आरती उतारे ll

पवन-2 जय हो-2, बुहारे डगरिया,

ओए मेरी, माँ की दुअरिया l

अमृत की, बरसे बदरिया...

ब्रम्हा बिष्णु, शंकर नाचे l

शंकर नाचे, भोला नाचे l

ब्रम्हा बिष्णु, शंकर नाचे,

मोहन-2 जय हो-2, बजाए बाँसुरिया,

ओए मेरी, माँ की दुअरिया l

अमृत की बरसे बदरिया,,,,,,,,,,,,,,,,

ओए प्रेम से बोलो,,, जय माता दी l

ओए सारे बोलो,,, जय माता दी l

ओए आते बोलो,,, जय माता दी l

ओए जाते बोलो,,, जय माता दी l

ओए कष्ट निवारे,,, जय माता दी l

माँ पार उतारे,,, जय माता दी l

मेरी माँ भोली,,, जय माता दी l

भर देती झोली,,, जय माता दी l

माँ जोड़े दर्पण,,, जय माता दी l

माँ दे के दर्शन,,, जय माता दी l

ओ जय माता दी,,, जय माता दी l

ओ जय माता दी,,, जय माता दी l

जयकारा,,,,, माँ शेराँवाली दा,,,,,,

बोल सच्चे दरबार की जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।