जय माता दी (धुनी माँ के नाम की)

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय माता दी-धुन

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जयकारा,,, शेराँ वाली का,,,

बोलो सच्चे दरबार की जय l

जयकारा,,, मेहराँ वाली का,,,

बोलो सच्चे दरबार की जय l

जयकारा,,, ज्योतां वाली का,,,

बोलो सच्चे दरबार की जय l

जयकारा,,, पहाड़ाँ वाली का,,,

बोलो सच्चे दरबार की जय l

जयकारा,,, वैष्णों वाली का,,,

बोलो सच्चे दरबार की जय l

सच्ची ज्योतों, वाली माता,,,

"तेरी सदा ही जय" l

जय माता दी,,, जय माता दी ll x21 ll

ओ प्रेम से बोलो,,, जय माता दी l

ओ सारे बोलो,,, जय माता दी l

ओ भक्तों बोलो,,, जय माता दी l

ओ मिलके बोलो,,, जय माता दी l

ओ ज़ोर से बोलो,,, जय माता दी l

ओ आते बोलो,,, जय माता दी l

ओ जाते बोलो,,, जय माता दी l

जय माता दी,,, जय माता दी ll

माँ अम्बे रानी,,, जय माता दी l

माँ वैष्णों रानी,,, जय माता दी l

माँ मनसा देवी,,, जय माता दी l

माँ नैणां देवी,,, जय माता दी l

माँ ज्वाला मईया,,, जय माता दी l

चामुण्डा मईया,,, जय माता दी l

माँ चिंतापुरनी,,, जय माता दी l

माँ संकट हरनी,,, जय माता दी l

माँ मँगल करनी,,, जय माता दी l

माँ जोड़े दर्पण,,, जय माता दी l

माँ दे के दर्शन,,, जय माता दी l

माँ कष्ट निवारे,,, जय माता दी l

मेरी माँ पार उतारे,,, जय माता दी l

मेरी माँ भोली,,, जय माता दी l

भर देती झोली,,, जय माता दी l

मेरी शारदा मईया,,, जय माता दी l

मेरी लक्ष्मी मईया,,, जय माता दी l

मेरी काली मईया,,, जय माता दी l

माँ जग कल्याणी,,, जय माता दी l

मेरी माँ सुहानी,,, जय माता दी l

बोलो, जय माता दी l

जय माता दी,,, जय माता दी ll

जयकारा,,, शेराँ वाली का,,,

बोलो सच्चे दरबार की जय l

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।