हरियालो सावन आयो दादी आज्यईयो

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज=कान्हुडा़ लाल घड़लो म्हारो ***

हरियालो सावन आयो दादी आजईयो

आजईयो माँ आजईयो

तीजां रो त्यौहार है आयो

थान बुलाऊं दादी चाव समायो

पोता पोती र आंगन आजईयो

हरियालो--------

मेहन्दी लगाऊं थार हाथां राचणी

सर पर उढा़ऊं थान लाल ओढ़णी

चुड़ो पहनाऊं थान आजईयो

हरियालो-------

आंगन मं थारी खातिर झुलो घालुं

चुन चुन कलियां झुलो सजाऊं

हौले सुं झोटा देउं आजईयो

हरियालो--------

सखियां बुलाऊं थान भजन सुणासी

खीर बणाऊं म्हारो मन सुख पासी

लाड लडा़ऊं थारा आजईयो

हरियालो--------

दादी म्हारी थारी याद सताव

मिलण री मन मं हुक घणी आव

उषा बुलाव थान आजईयो

हरियालो--------

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।