तुम्हारे प्यार ने गुरुवर हमको...

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दोहा: बिना नयन पावे नहीं,बिना नयन की बात।

सैवे सदगुरु के चरण, सो पावे साक्षात।।

तुम्हारे प्यार ने गुरुवर हमको तुमसे जोड़ा है।

तुम्हारे प्यार के बल पर सभी भोगों को छोड़ा है।

तुम्हारे प्यार ने गुरुवर...

(1)तुम्ही तीरथ हो मंदिर हो,तुम्ही को मेरी बंदगी।

तुम्ही धड़कन हमारी हो, तुम्ही हो मेरी जिंदगी।

∆तेरी करुणा ने ही गुरुवर, हमे खुशियों से जोड़ा है।

तुम्हारे प्यार ने गुरुवर.

(2)तुम्ही धड़कन में मेरी हो,तुम्ही नजरो में समाये हो।

मेरा वीरान था जीवन,तुम्ही बहार लाए हो।

∆तेरी कृपा ने ही हमको,सच्चे सुख से जोड़ा है।

तुम्हारे प्यार ने गुरुवर..

(3)तेरा ही नाम हे गुरुवर,सभी दुखों को हरता है।

है सचमुच धन्य ओ प्राणी,जो तेरा ध्यान धरता है।

∆तुम्हारे ज्ञान ने हमको सही दिशा में मोडा है।

तुम्हारे प्यार ने गुरुवर...

(4)तुम्हारी याद में गुरुवर,आंसू आंख से बहते है।

तुम्हे जो देख ना पाए ,तो बैचेन रहते है।।

∆तुम्हारे प्यार के आगे सभी का प्यार थोड़ा है।

तुम्हारे प्यार ने गुरुवर हमको तुमसे जोड़ा है।

।डॉ सजन सोलंकी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।