भोली भाली बरसाने वारी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे रानी सावरे की प्यारी है

श्यामा जू सावरे की प्यारी है

भोली भाली बरसाने वारी है

किया गहवरवन में वास लाडली लीला है न्यारी

1) राधा नाम की धुन जब लागे, धुन जब लागे

श्याम घूमते पीछे आगे, पीछे आगे

राधा का दीवाना बिहारी है

भोली भाली बरसाने वारी है

2) बरसाना बृज की है राजधानी, है राजधानी

जहां बिराजे राधा रानी, राधा रानी

भक्तों की बिगड़ी सवारी है

भोली भाली बरसाने वारी है

3) मुरली में कान्हा और सुर जब साधे, सुर जब साधे

गाती है बंसी श्री राधे राधे, श्री राधे राधे

श्यामा की महिमा भारी है

भोली भाली बरसाने वारी है

4) श्यामा श्याम में भेद न कोई, भेद न कोई

चारों दिशाओं में जय जय हुई, जय जय हुई

भूलन की बाधा तारी है

भोली भाली बरसाने वारी है

किया गहवरवन में वास लाडली लीला है न्यारी

लीला है नारी लाडली लीला है न्यारी

किया गहवरवन में वास लाडली लीला है न्यारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।