कोख मै ना मारे आवन दे संसार मै

कपिल सैनी
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कोख मै ना मारे, आवन दे संसार मै

मात मेरी सुनले, अर्ज करू दरबार मै

बासी सुखी रोटी खा के, कर ल्यू गी गुजारा माँ

जिसा देवेगी उसा पहर ल्यू, टोकुगी दोबारा ना

मन्ने आवण दे इस जग मै, मत ना जुलम करे मेरे तन मै

हाथ जोड़ के कहरी मै, मात मेरी,,,,,,,,,

लाड़ करुँगी भाई के, कदे भी दुख त ना राखु

पोची बाँध के भाई क, उम्र तेरी की दुआ मांगू

स या भाई ने बाहण प्यारी, मत ना करे तू इस त न्यारी

इतना तू कहन पूगा दे न, मात मेरी,,,,,,,

6 महीने की होंगी पूरी, ईब क्यों मन मै आई से

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, कड़े तक या सचाई से

मेरे कुछ ना समझ मै आरी, करदी अपनी कोख ते न्यारी

कपिल ने तू समझा दे न, मात मेरी सुनले

लेखक : कपिल सैनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।