किधर चली माँ शेर

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

किधर चली माँ शेर सजाके जंगल नु,

पावा फुल्लां दे हार आजा मंदिर नु

माँ तन दा भवन बनावा,विच आसन तेरा लावा,

एहना नैना दे दो दरवाजे मैं तेरे भवन नु लावा,

दाती तेरे मंदिर पावा फुल्लां दे हार आजा मंदिर नु,

माँ सूरज चंदा आये तेरे ली हार लाए,

तेरी जोती दे आगे आगे दोहा ने शीश झुकाए,

दाती तेरे मंदिर पावा फुल्लां दे हार आजा मंदिर नु,

माँ आवी सावन उते मैं वारा मोती सुचे,

मैं दर्श तेरे दी खातिर आवा पहाडा उते,

तेरे दर्शन नु पावा फुला दे हार आजा मंदिर नु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।