बलिहारी बलिहारी बोलो बलिहारी नंदलाल की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चिंता करें भलाई हमारी इस माया जंजाल की

बलिहारी बलिहारी बोलो बलिहारी नंदलाल की

1, जी मालिक ने जन्म दिया है अन्य वस्त्र भी दे देगा,,

सिर ढकने को छत देवे गा खबर हमारी ले लेगा ,,,,

भजन करो निस चिन्त हो चिंता छोड़ो रोटी दाल की,,,,,

बलहारी बलहारी बोलो ,,,,,

2 छड़ भर को न हमे छोड़ता सदा हमारे साथ में है,,,,

जीवन की सांसा डोरी उस परम पिता के हाथ में है,,,

हंसना रोना जीना मरना छोड़ो चिंता गात की ,,,,,,

बलहारी बलहारी बोलो ,,,

मथुरा में जाओगे तो घनस्याम मिलेंगे

सीना फाड़ के बैठे श्री हनुमान मिलेंगे

दाऊजी में जाओगे तो बलराम मिलेंगे

माता पिता के चरणों में चारो धाम मिलेंगे,,,,,,,,,,

3 कली, काहे की तू चिंता करता करना है सो राम करें,,,

नाम हरि का भजले मूरख यही तेरा उधार करें,,,,

तोड़, मनीष कुमार तू गुरु मानले जो खोल मुक्ति द्वारा की,,,,,

बलहारी बलहारी बोलो ,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।