मनुष जनम अनमोल रे मिट्टी में ना रोल रे

कन्हैया आगिवाल
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॥ पावन पाठ ॥

मनुष जनम अनमोल रे मिट्टी में ना रोल रे,

अब जो मिला है फिर ना मिलेगा,

कभी नहीं रे, कभी नहीं रे, कभी नहीं रे,

तू सत्संग में आया कर, गीत प्रभु के गाया कर

साँझ सवेरे बैठ के बन्दे, गीत प्रभु के गाया कर

नहीं लगता कुछ मोल रे, मिट्टी में ना रोल रे

अब जो मिला है फिर ना मिलेगा

कभी नही कभी नहीं कभी नही रे

तू है बुद बुद पानी का, मत कर जोर जवानी का

समझ संभल के कदम रखो, पता नही जिंदगानी का

सबसे मीठा बोल रे, मिट्टी में ना रोल रे

अब जो मिला है फिर ना मिलेगा

कभी नही कभी नहीं कभी नही रे

मतलब का संसार है, इसका क्या ऐतबार है

संभल संभल के कदम रखो, फुल नही अंगारे है

मन की आँखे खोल रे, मिट्टी में ना रोल रे

अब जो मिला है फिर ना मिलेगा

कभी नही कभी नहीं कभी नही रे

मनुष जनम अनमोल रे मिट्टी में ना रोल रे,

अब जो मिला है फिर ना मिलेगा

कभी नही कभी नहीं कभी नही रे

स्वर - कन्हैया आगिवाल

9922719110

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।