की खट्टया मैं तेरा लाल बणके मां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कदे पुरियां ना होईयां - कदे पुरियां ना होईया

कर कर अरजोईयां - अखा हंजुआ नाल धोईयां

रहगी सदरां मां मेरीयां, जंजाल बण के

की खट्टया मैं तेरा लाल वण के .......

ना मैं होर दर जाके - कदे अलख जगाई

रया तेरे ही भरोसे - खैर पाई जा ना पाई

मेरे रहगे मां सवाल ही सवाल बण के ........

की खट्टया मैं तेरा लाल वण के ........ .2

ना मैं कित्तियां शकैता तेरी किसे कोल बहके

तेरी रजा विच राजी- मैं ता रिया सब सहके

सोचां सोचां विच पै गईयां ख्याल बण के.......

की खट्टया मैं तेरा लाल बण के ....... 2

कईयां लघियां तरीकां, सालो साल लघं चले

माए अज ताई मेरे दिन, आए ना सव्वले

दिन इक इक लंघे मेरा साल बणके......

की खट्टया मैं तेरा लाल बण के.......... 2

पुरी होई ना स्नेही, दी जे तां वी गल की ए

ताने मारू तैनू पोला - दस कमले दा की ए

हाल जिन्दड़ी दा रह गिया - बेहाल बण के...

की खट्टया मैं तेरा लाल बण के........2

Geetkaar Rambilash Snehi Siwan

Singer Kulwant Kamla

Bunti Saini Siwan M.8053740265

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।