मेरी कदे न छोड़ना बांह तेरे बिन रुल जांऊगी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी कदे ना छडी बांह

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

शेरावालिए, शेरावालिए, शेरावालिए नी मेरी मां

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

मेरी कदे ना छड्डी बांह,

तेरे बिन रुल जाऊंगी,,

तेरे बिन रुल जाऊंगी।

शेरावालिए नी मेरी मां तेरे बिन रुल जाऊंगी

ताने मेहने दातीए नी

दुनिया दे जर के,

जानदा तू दाती किंवें,

जीवां मर मर के,

होर दुख मेथो जर हुंदे ना,

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

मेरी कदे ना छडी बांह,

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

शेरावालिए, शेरावालिए, शेरावालिए नी मेरी मां

तेरे बिन रुल जाऊंगी।

तेरे बिन रुल जाऊंगी

आई तेरे द्वार मैंनू दर्श दिखादे मां

बदल दे लेखे मेरे दुख तू मिटादे मां

मैंनू चरणां दे विच्च देदे थां

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

तेरे बिन रुल जाऊंगी

मेरी कदे ना छड्डी बांह,

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

शेरावालिए, शेरावालिए, शेरावालिए नी मेरी मां

तेरे बिन रुल जाऊंगी।

तेरे बिन रुल जाऊंगी

तेरे बिन रुल जाऊंगी

तेरे बाजो दाती मैनूं,

होर कौन पुछदा,

तेरे बिना लैंदा ना ऐ,

दास साह सुख दा,

देदे प्यार वाली ठंड़ी ठंडी छा

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

मेरी कदे ना छड्डी बांह,

तेरे बिन रुल जाऊंगी,

शेरावालिए, शेरावालिए, शेरावालिए नी मेरी मां

तेरे बिन रुल जाऊंगी

तेरे बिन रुल जाऊंगी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।