जबसे देखी ये सूरत प्यारी

पारंपरिक
अन्य भजन जैन भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - ओ फिरकी वाली ....

हो .. जबसे देखी , ये प्यारी सी मूरत

है बड़ी खूबसूरत , माँ मरूदेवा के लाल की ।

मेरे ऋषभ जिणन्द दयाल की ।।

हो ..मनोहारी , ये लागे बड़ी प्यारी

में जाँऊ बलिहारी , ये मूरत है कमाल की ।

मेरे ऋषभ जिणन्द दयाल की ।।

हो ..जबसे देखी ...

।।।।

हो.. सूरज की किरणें आकर के जिनके , मुख पे

करती उजियारा ।

चमक रहा दिव्य तेज ललाट पे , नैनो से बहे

अमिरस धारा ।

शीश मुकुट है -2 कानो में कुंडल

गल मोतियन की माला

डायमंड वाली , ये अंगिया निराली , नजर जिसने

डाली , वो हो गया निहाल जी

मेरे ऋषभ जिणन्द दयाल की ।।

हो ..जबसे देखी ...

।।।।

देख तुम्हारा श्रंगार हो दादा , भक्तो का मन हर्षाये

जी करता है दर्शन करके , हम तुझमे ही खो जाये

दर पे तुम्हारे - 2 आकर दादा , फिर वापस न

जाये ।

दिलबर दिनेश , की यही है तमन्ना , तेरे चरणों मे

रहना , ये अर्जी है तेरे लाल की

दादा रखना मेरा भी ख्याल जी

हो ..जबसे देखी ...

।।।।

।। गायक ।।

दिनेश जैन मुम्बई

✍️ रचनाकार ✍️

दिलीप सिंह सिसोदिया

❤️ दिलबर ❤️

नागदा जक्शन म.प्र .

संपर्क: 9907023365

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।