उज्जैन से खाटू आए भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन खाटू श्याम भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।

मिलवाने ये तो म्हारे बाबा श्याम से, करने थोड़ी बात से।

आए उज्जैन के महाकाल जी।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।

हाथ त्रिशूल गले सर्पों की माला, आया भूत बाराती।

नन्दी नाचे संगी नाचे, नाचे है महाकाल जी।

लेकर के पूरी टोली भोलेनाथ जी, ओ बाबा भोलेनाथ जी।

आए उज्जैन के महाकाल जी।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।

ब्रम्हा आए विष्णु आए,संग में मेरे राम जी।

देख सवारी घबरा जाए, ऐसे हैं महाकाल जी।

नन्दी pe चढ़कर आए भोलेनाथ जी, ओ बाबा भोलेनाथ जी।

आए उज्जैन के महाकाल जी।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।

श्याम धनी ने पता चला है , आ रहे महाकाल जी।

ना ही अब तो चैन पड़े है, ना ही करे श्रृंगार जी।

निलो को लेने भेजे तोरण द्वार जी, ओ बाबा तोरण द्वार जी।

आए उज्जैन के महाकाल जी।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।

तोरण द्वार पे पहुंच गए हैं, आ गए महाकाल जी।

ढोल नगाड़ा बजाड़ा वाले , इंद्र करे बरसात जी।

मयूरी भी पहुंची देखो, अमन भी पहुंचा देखो, खाटू धाम जी। ओ बाबा खाटू धाम जी।

आए उज्जैन के महाकाल जी।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।

मिलवाने ये तो म्हारे बाबा श्याम से, करने थोड़ी बात से,आए उज्जैन के महाकाल जी।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।।

उज्जैन से खाटू नगरी आए भोलेनाथ जी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।