दर्शन की आस है मुझे गिरधारी आईये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दर्शन की आस है मुझे, गिरधारी आईये

आँखों की प्यास सवारे, आ कर बुझाईये

1 ) रातो की नींद उड़ गई, दिन में ना चैन है

तकते तुम्हारी राह बस, व्याकुल ये नैन है

मीठी मुरलियाँ कानुहड़ा, फिर से बजाइये

दर्शन की आस है मुझे, गिरधारी आईये

2 ) देखे बिना तुझे हुआ, ये मन उदास है

फिका तेरे बिना सभी, चाहे कुछ भी पास है

चितचोर श्याम मेरे भी, चित को चुराइये

दर्शन की आस है मुझे, गिरधारी आईये

3 ) पागल कोई कहे मुझे, कोई कमली कह रहा

तेरे बिना बेचारा दिल, क्या क्या सह रहा

दीवानगी की हद सभी, मोहन मिटाइये

दर्शन की आस है मुझे, गिरधारी आईये

4 ) प्यारे हमे बताओ तुम, कब तक रुलाओगे

बिरह की आग हृदय में, कब तक जलाओगे

भूलन कहे ना और अब, हमको सताइये

दर्शन की आस है मुझे, गिरधारी आईये

दर्शन की आस है मुझे, गिरधारी आईये

आँखों की प्यास सवारे, आ कर बुझाईये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।