एक दिन जाणो रे सावरीया

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

एक दिन जाणो रे सावरीया मारे कई लेवा आणो रे एक दिन जाणो रे

काया छोड़ संसार हाथ में कई नहीं आणो रे एक दिन जाणो रे

जिवता मां बाप ने रोटी नहीं देवे

मर्या पचे गंगाजल लावे मारे कई पीणो रे एक दिन जाणो रे

भूखा मां बापा ने रोटी नहीं देवे

मर्या पचे तो लाडू बनावे मारे कई खाणो रे एक दिन जाणो रे

बूढा मां बापा के कपडा नहीं लावे

मर्या पचे नया कपड़ा लावे मारे कई परणो रे एक दिन जाणो रे

मा का जाया बोले नहीं अण बोल्या रेवे

मर्या पचे तो गुण गावे मारे कई हुणणो रे एक दिन जाणो रे

दुखी मा बापा ने रुपया नहीं देवे

मर्या मुंह में रुपयो रखावे मारे कई लेणो रे एक दिन जाणो रे

भाई भाई आपस में प्यार नी निभावे

मर्या पचे तो सर मुण्डवावे मारे कई देखणो रे एक दिन जाणो रे

बहन बेटिया कदी मिलवा नही आवे

मर्या पचे वे आंसु बहावे मारे कई करणो रे एक दिन जाणो रे

मां बापा की सेवा करनी रामचंद्र यु केवे

जोड तोड यो मुकेश गावे धर्म निभाणो रे एक दिन जाणो रे

एक दिन जाणो रे सावरीया मारे कई लेवा आणो रे एक दिन जाणो रे

काया छोड़ संसार हाथ में कई नहीं आणो रे एक दिन जाणो रे

Singer and writer - Mukesh Jatav कोचवा

9001573099

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।