मुरली चैन चुरावे है मुरली ना बजाओ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुरली चैन चुरावे है मुरली ना बजाओ…….2

मुरली ना बजाओ बन्सी ना बजाओ……..2

बन्सी ना बजाओ मुरली ना बजाओ………2

राधे राधे गावे है सुन के दौड़ी आओ……..2

1 ) मुरली की धुन हमे सोने ना देती……..2

बन्सी बेचारी किसी का क्या लेती……..2

मुरली की धुन हमे सोने ना देती

बन्सी बेचारी किसी का क्या लेती

बेरन बहुत सतावे है

मुरली ना बजाओ…….2

2 ) ये बाँसुरी राधे प्राणों से प्यारी……..2

हमको लगे हैं ये सौतन हमारी………..2

ये बाँसुरी राधे प्राणों से प्यारी

हमको लगे हैं ये सौतन हमारी

काहे तू जल जल जावे है

सुन के दौड़ी आओ……..2

3 ) हमसे करो ना कन्हिया ठिठोली……….2

बोले मुरलिया ये प्रेम की बोली……….2

हमसे करो ना कन्हिया ठिठोली

बोले मुरलिया ये प्रेम की बोली

जमुना पे हमको बुलावे है

मुरली ना बजाओ…….2

4 ) बन्सी से रूठो ना बरसाने वाली………2

भूलन भुलावे ये शुद्ध बुद्ध सारी………..2

बन्सी से रूठो ना बरसाने वाली

भूलन भुलावे ये शुद्ध बुद्ध सारी

मेरे मन को भावे है

सुन के दौड़ी आओ……..2

मुरली चैन चुरावे है मुरली ना बजाओ…….2

मुरली ना बजाओ बन्सी ना बजाओ……..2

बन्सी ना बजाओ मुरली ना बजाओ………2

राधे राधे गावे है सुन के दौड़ी आओ……..2

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।