स्वर्ग से सुंदर सपनो से प्यारा है तेरा दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

स्वर्ग से सुंदर सपनो से प्यारा है तेरा दरबार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

रोशन है मेरी दुनिया, तेरे ही प्यार से,

सब कुछ मिला है मुझे इस दरबार से,

रोशन है मेरी दुनिया, तेरे ही प्यार से,

सब कुछ मिला है मुझे इस दरबार से,

तेरी शरण में आकर मिला है एक नया परिवार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

स्वर्ग से सुंदर सपनो से प्यारा है तेरा दरबार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

जब अपना हाथ मेरे, सिर पर फिरती,

मेरी सारी विपदा दूर हो जाती,

जब अपना हाथ मेरे, सिर पर फिरती,

मेरी सारी विपदा दूर हो जाती,

हम पर अपनी ममता लूटाकार बना दिया हकदार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

स्वर्ग से सुंदर सपनो से प्यारा है तेरा दरबार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

तुम हो हमारी मैया, हम है तुम्हारे,

मुझको तो लगते प्यारे तेरे हर नज़ारे,

तुम हो हमारी मैया, हम है तुम्हारे,

मुझको तो लगते प्यारे तेरे हर नज़ारे,

हमको ऐसी सेवा मिली है, जहा की क्या दरकार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

स्वर्ग से सुंदर सपनो से प्यारा है तेरा दरबार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

स्वर्ग से सुंदर सपनो से प्यारा है तेरा दरबार,

जहा तेरा प्यार मिला है, मुझे हर बार मिला है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।