राधे राधे श्री हरिवंश

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रीति न काहु की कानि बिचारै ।

मारग अपमारग विथकित मन को अनुसरत निवारै ।। [1]

ज्यौं सरिता साँवन जल उमगत सनमुख सिंधु सिधारै ।

ज्यौं नादहि मन दियें कुरंगनि प्रगट पारधी मारै ।। [2]

(जै श्री) हित हरिवंश हिलग सारँग ज्यौं सलभ सरीरहि जारै ।

नाइक निपून नवल मोहन बिनु कौन अपनपौ हारै ।। [3]

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।