सन्ता रे चरणा में चित्त म्हारो लागियो

साध्वी देवपूजा जी
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॥ पावन पाठ ॥

सन्ता रे चरणा में चित्त म्हारो लागियो.....

सन्ता रे चरणा में चित्त म्हारो लागियो,

सन्ता रे शरणा में आनन्द पाये,

भीगी-भीगी,,

भीगी भीगी गेरुए रंग म्हारी चुनरी,

गुरुवर री मेहर हुई जो बरसाए,

सन्ता रे चरणा में......

मन अति प्रसन्न भयो, गुरुवर रे रंग थयो,

मन अति प्रसन्न भयो, संतों रे संग थयो,

रंग भयो संग थयो, मन अति प्रसन्न भयो,

पूर्व पूण्यों सू मिल्या, आप म्हाने बापजी,

आपरे ही चरणा में शीश नवाये,

भीगी भीगी......

मौजी-मस्त इण फकीरों का है देश ये निराला,

जग री रीत सारी जीत पाते सबको अमर प्याला,

सन्त आया तारणे, जग को उद्धार ने,

कोटि-कोटि जन्मों रा पाप मिटाये,

भीगी-भीगी......

रचनाकार - साध्वी देवपूजा जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।