शीश जटा में गंग विराजे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

( ॐ नाम एक सार है, जासे मिटत कलेश,

ॐ नाम में छिपे हुए है, ब्रम्हा विष्णु महेश॥ )

शीश जटा में गंग विराजे,

गले में विषधर काले,

डमरू वाले ओ डमरू वाले......

तुमने लाखो की बिगड़ी बनाई,

अपने अंग भभूत रमाई,

जो भी तेरा ध्यान लगाए,

उसको सब दे डाले,

डमरू वाले ओ डमरू वाले........

नित अंग पे भस्मी लगाए,

जाने किसका तू ध्यान लगाए,

रहता है अलमस्त ध्यान में,

पीकर भंग के प्याले,

डमरू वाले ओ डमरू वाले.....

सब देवो ने अमृत पाया,

तुम्हे जहर हलाहल भाया,

महल अटारी सबको बांटे,

तुम हो मरघट वाले,

डमरू वाले ओ डमरू वाले......

भोले सुनलो अरज हमारी,

हम आये शरण तुम्हारी,

सब देवो में देव बड़े हो,

दुनिया के रखवाले,

डमरू वाले ओ डमरू वाले..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।