सांची सांची कह दे रे कान्हा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज – थारे वास्ते रे ढोला थारे वास्ते

सांची सांची कह दे रे बाबा,

सांची सांची कह दे रे कान्हा,

कोण लागु मै तेरी कोण लागू,

तू मेरो कोण लागे,

तू मेरो कोण लागे.......

गिर जाऊं पकड़ उठावे,

भटकूँ तो राह दिखावे,

घबराऊ दौड्यो आवे,

हिवड़े ने धीर बंधावे,

दोड़्यो आवे, भाग्यो आवे,

काम बणावे, पर नजर ना आवे,

पीछे पीछे चलूँ तू तो,

चले आगे आगे रे मेरे,

चले आगे, तू मेरो कोण लागे......

अटक्योड़ा काम बणावे,

खर्चो यो कोण चलावे,

मैं तो गानो नही जाणु,

किरपा है तेरी तू गवावे,

तू ही जाणे तेरी माया,

तन्ने वेद समझ नही पावे,

में क्या जाणु तू ही जाणे,

सुत्या भाग जागे रे म्हारा,

भाग जागे, तू मेरो कोण लागे......

रक्षा करे हरदम तू मेरी,

छोडूंगी ना चोखट तेरी,

सेवा तेरी करती रहु में,

अभिलाषा है ये श्याम मेरी,

उमा लहरी शरण तुम्हारी,

पत राखो हे कृष्ण मुरारी,

साँवरा सलोना मेरा तू,

रहियो सागे सागे मेरे,

रहियो सागे, तू मेरो कोण लागे.........

सांची सांची कह दे रे बाबा,

सांची सांची कह दे रे कान्हा,

कोण लागु मै तेरी कोण लागू,

तू मेरो कौन लागे,

तू मेरो कोण लागे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।