ओ विष पीने वाले छुपा तू किधर है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी जिंदगी में, ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है.......

ना तुमसा दयालु, कोई और भोले,

ना तुमसा दयालु, कोई और भोले,

जो ठुकरा के अमृत को पिए विष के प्याले,

लिया तीनों लोकों का, भार अपने सर है,

विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है........

गरीबों का साथी ना बनता है कोई,

फ़साने भी उनके ना सुनता है कोई,

यहाँ फेर ली अपनों ने भी नजर है,

विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है........

बड़ी आस लेकर केतुमको पुकारा,

करदो दया मुझपे, हूँ ग़म का मारा,

कहे सोनू होता ना मुझसे सबर है,

विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,

मेरी जिंदगी में, ग़मों का ज़हर है,

विष पीने वाले, छुपा तू किधर है,

ओ विष पीने वाले, छुपा तू किधर है........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।