ओ गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार,

ना कोई चिंता ना कोई टेंशन, अजब निराली सरकार,

ओ गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

ना गौरा तुझे पानी की चिंता,

वाकी जटा में गंगा धार, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

ना गौरा तुझे बिजली की चिंता,

वाके माथे पर चमके चांद, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

ना गौरा तुझे महलों की चिंता,

वाको पर्वत ऊपर वास, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

ना गौरा तेरे सास ननंद है,

ना दबाने पड़ेंगे तुझे पाँव, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

ना गौरा तेरे दौरानी जिठानी,

ना होगी किसी से राड, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

ना गौरा तुझे घूमने की चिंता,

रहे नंदी की सवारी तैयार, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

ना गौरा तुझे खाने की चिंता,

वह तो खाए धतूरा भांग, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

मस्त मलंगा वह भीख मंगा,

वह डमरु बजावे दिन-रात, गौरा तोहै कैसे मिले हैं भरतार......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।